हनुमानगढ़ी परिसर में आयाेजित हुई प्रेसवार्ता, सीबीआई व ईडी जांच की किया मांग।
अयोध्या। पटना के महावीर हनुमान मंदिर का मामला एक बार फिर सुर्खियाें में छाया हुआ है। जिस पर हनुमानगढ़ी ने अपना दावा ठोका है। इस संबंध में गुरूवार को हनुमानगढ़ी परिसर में आयाेजित प्रेसवार्ता के दाैरान महंत महेंद्र दास ने कहा कि वह हनुमानगढ़ी द्वारा नियुक्त पटना महावीर मंदिर के सर्वराहकार महंत हैं। उनका लगभग ढ़ाई साल पहले संत-महंतों ने कंठी, चद्दर किया था। पटना का महावीर मंदिर रामानंद संप्रदाय का है, जिसका मुख्यालय सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी है। महंत ने सचिव किशाेर कुणाल पर आराेप लगाते हुए कहा कि उन्होंने महावीर मंदिर को प्राइवेट लिमिटेड बना दिया है। इसकी सीबीआई और ईडी से जांच होनी चाहिए। सचिव बनने से पहले व बाद में उनके पास कितनी संपत्ति थी। किशोर कुणाल मंदिर में गुरु शिष्य परंपरा को खत्म कर पिता पुत्र की परंपरा की नई शुरुआत किया है, जिसके खिलाफ अब हनुमानगढ़ी के संत सीधी लड़ाई लड़ेंगे। वहीं श्रीनिर्वाणी अनी अखाड़ा के पूर्व प्रधानमंत्री बाबा माधवदास महाराज ने कहा कि आज से 350 वर्ष पूर्व तीनाें अनी अखाड़े के संस्थापक जगद्गुरू स्वामी बालानंद महाराज ने महावीर मंदिर पटना की स्थापना किया था। तब से वहां हनुमानगढ़ी की परंपरा चली आ रही है। निर्वाणी अनी अखाड़ा का पूरे भारतवर्ष में स्थान है। उसी में से एक पटना का महावीर मंदिर भी है। लेकिन किशाेर कुणाल ने 1987 के बाद महावीर मंदिर पर अपना वर्चस्व बना लिया और हनुमानगढ़ी की संपत्ति काे हड़प ली। हमारी चीज हमको वापस की जाए। नही ताे इसके लिए हम आंदोलन करेंगे। हमारा आंदोलन चलता रहेगा। महावीर मंदिर के सामने जाकर हम साधु-संत धरने पर बैठ जायेंगे। धर्म सम्राट महंत ज्ञानदास महाराज के शिष्य व संकटमोचन सेना राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय दास महाराज ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच हाे। इसके लिए सीबीआई व ईडी से जांच कराई जाए। सचिव बनने से पहले और बाद में किशाेर कुणाल के पास कितनी संपत्ति थी। यही हम संताें की मांग है। प्रेसवार्ता में बाबा रघुनाथ दास, पहलवान इन्द्रदेव दास, पहलवान मनीरामदास, दुर्गा बाबा, चंदन दास, प्रेममूर्ति कृष्णकांत दास, शिवम श्रीवास्तव भी माैजूद रहे।