जमीन पर कब्जा करने का मामला: एसओ और बिल्डर पर इनाम घोषित करने की तैयारी, पीड़ित परिवार ने डीजीपी के पास लगाई दरख्वास्त।मांगी मदद।

  उत्तर प्रदेश के आगरा में बेशकीमती जमीन पर भू माफिया की नजर है। 10 हजार गज ही नहीं, सैकड़ों बीघा जमीन पर कब्जे के मामले आ चुके हैं। जगदीशपुरा में नाथ का बाग की जमीन पर कब्जा कर लिया गया था। एत्मादपुर में करोड़ों की जमीन पर फर्जी मालिक बनकर बेचा गया था। पुलिस ने दोनों ही मामलों में कार्रवाई की थी।

     तहसील से मांगी गई रिपोर्ट

डीसीपी सिटी सूरज राय ने बताया कि जिस जमीन पर कब्जा किया गया, वह जमीन उमा देवी की बताई गई है। पुलिस को जो दस्तावेज दिखाए जा रहे हैं, वो पर्याप्त नहीं है। इसलिए तहसील से रिपोर्ट मांगी गई है। सीआरपीसी की धारा 91 के तहत नोटिस देकर पूछा गया है कि जमीन तहसील में किसके नाम पर है। पिछले 4-5 साल में कोई परिवर्तन तो नहीं किया गया। कोई वाद तो पहले से दर्ज नहीं है।

    इनाम घोषित करने की व्यवस्था

थाना जगदीशपुरा में दर्ज मुकदमे में आरोपी फरार तत्कालीन एसओ जितेंद्र कुमार, बिल्डर कमल चौधरी सहित अन्य की गिरफ्तारी के लिए पुलिस दबिश का दावा कर रही है। मगर, तीन दिन बाद भी पुलिस खाली हाथ ही है। इस पर इनाम की तैयारी की जा रही है। आरोपियों पर दबिश के बाद इनाम घोषित किया जाएगा।

    कार्रवाई में देरी करना पड़ा भारी।

        पुलिस आयुक्त डॉ. प्रीतिंदर सिंह के स्थानांतरण के पीछे कार्रवाई में देरी को भी एक वजह माना जा रहा है। फर्जी मुकदमे दर्ज कर जेल भेजने के बाद पीड़ितों ने डीजीपी से गुहार लगाई थी। इस पर जांच हुई। मगर, मामला चर्चा में आने के बाद एसओ सहित तीन को निलंबित गया। मुकदमा भी देरी से लिखा गया। लखनऊ तक मामले की गूंज थी।
      अब बैनारा फैक्टरी के पास 10 हजार गज जमीन का मामला सुर्खियों में है। इसमें परिवार को फर्जी मुकदमे में जेल भेजकर कब्जा जमाया गया। इस जमीन के पास और भी जमीन है। इन पर भी भू माफिया की नजर है। अवैध कब्जे से लेकर फर्जी एग्रीमेंट तक की शिकायत तहसील से लेकर पुलिस अधिकारियों के पास पहुंच रही हैं। पीड़ितों को एक दफ्तर से दूसरे के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। पुलिस जांच करेगी तो कई और मामले निकल आएंगे।

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