अयोध्या। अयोध्या की आध्यात्मिक यात्रा को और सुलभ व सुविधाजनक बनाने की कवायद शुरू की गई है। इसके तहत गुप्तारघाट से राजघाट तक लक्ष्मण पथ का निर्माण कार्य चल रहा है। श्रद्धालुओं को राम मंदिर तक सीधा और सुविधाजनक मार्ग देने के उद्देश्य से यह भव्य फोरलेन सड़क लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जा रही है। इससे सरयू स्नान करने वाले श्रद्धालुओं को सीधे राम मंदिर पहुंचने में आसानी होगी।
राम मंदिर निर्माण के साथ ही अयोध्या की कनेक्टिविटी को भी लगातार बेहतर किया जा रहा है। रामपथ, भक्ति पथ, रामजन्म भूमि पथ, सुग्रीव पथ, अवध आगमन पथ व धर्मपथ के बाद अब एक नया नाम लक्ष्मण पथ का जुड़ने जा रहा है। यह पथ गुप्तारघाट से राजघाट तक बनाया जा रहा है। यह पथ उदया हरिश्चंद्र घाट तटबंध के समानांतर प्रस्तावित है।
तटबंध की चौड़ाई पहले छह मीटर थी, जिसे एक मीटर बढ़ाकर सात मीटर कर दिया गया है। इधर, लक्ष्मण पथ की चौड़ाई 18 मीटर तय की गई है जो पहले सात मीटर थी। अब गुप्तारघाट से श्रद्धालु सीधे राजघाट तक यानी राम मंदिर के पीछे पहुंच जाएंगे। जहां से राम मंदिर की दूरी मात्र 500 मीटर है। इस मार्ग का प्रयोग रामनगरी में भीड़ नियंत्रण के लिए भी किया जा सकेगा। मेलों, पर्व व त्योहारों के दौरान जब अयोध्या में भीड़ का दवाब अधिक होगा तो स्थानीय लोगों के साथ-साथ श्रद्धालुओं की अयोध्या यात्रा को यह पथ सुगम बनाएगा।सुगम यातायात और तीर्थ यात्रियों की भारी भीड़ को ध्यान में रखकर फोरलेन सड़क पर पैदल पथ व सुविधाएं विकसित की जा रही है। इसके तहत श्रद्धालुओं के लिए शेडेड वॉकवे, शौचालय, पेयजल की व्यवस्था होगी। आध्यात्मिक थीम पर पथ के किनारे बनेगा धार्मिक प्रतीकों और रामायणकालीन कथाओं से सुसज्जित भित्ति चित्र। इससे स्थानीय व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
अधिशाषी अभियंता लोक निर्माण विभाग एसपी सिंह ने बताया कि लक्ष्मण पथ का निर्माण सुस्त गति से चल रहा है। बारिश की वजह से मार्ग की पटाई के लिए मिट़्टी नहीं मिल पा रही है। अगले माह से यह रफ्तार पकड़ेगा। मार्ग की कुल लंबाई 6़ 7 किमी होगी। मार्च 2026 तक इसका निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।