काशी की तरह देश के पूर्वी राज्य असम में मां कामाख्या कॉरिडोर विकसित होगा। इस पर कुल 498 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पीएम मोदी ने मां कामाख्या कॉरिडोर का शिलान्यास किया। मोदी ने कहा कि आजादी के बाद सत्ता में रहे लोग पूजा स्थलों के महत्व को नहीं समझ सके।
उन्होंने कहा अयोध्या में भव्य आयोजन के बाद मैं अब यहां मां कामाख्या के द्वार पर आया हूं। मुझे मां कामाख्या दिव्यलोक परियोजना का शिलान्यास करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। जब यह बनकर पूरा होगा तो ये देश और दुनियाभर से आने वाले मां के भक्तों को असीम आनंद से भर देगा। राम मंदिर का उद्घाटन हो चुका है और 2024 के चुनाव में मंदिर मुद्दा अहम होगा। केंद्र का फोकस इन धार्मिक कॉरिडोर पर है और अब राज्य सरकारें भी इस पर फोकस कर रही हैं। इसका ताजा उदाहरण ओडिशा भी है। जहां पिछले महीने ही जगन्नाथ मंदिर हेरिटेज कॉरिडोर का उद्घाटन हुआ। काशी और महाकाल कॉरिडोर बनने के बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है।
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के बाद।
पिछले दो सालों में काशी कॉरिडोर बनने के बाद लगभग 13 करोड़ से अधिक श्रद्धालु काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे। पीएम मोदी ने 13 दिसंबर 2021 को काशी कॉरिडोर का लोकार्पण किया था। परिसर में मेडिकल सुविधा, जलपान, बैठने की व्यवस्था, गंगा द्वार जैसी सुविधाएं लोगों को प्रभावित करती हैं।
पिछले दो सालों में काशी कॉरिडोर बनने के बाद लगभग 13 करोड़ से अधिक श्रद्धालु काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे। पीएम मोदी ने 13 दिसंबर 2021 को काशी कॉरिडोर का लोकार्पण किया था। परिसर में मेडिकल सुविधा, जलपान, बैठने की व्यवस्था, गंगा द्वार जैसी सुविधाएं लोगों को प्रभावित करती हैं।
अर्थव्यवस्था के नजरिए से देखा जाए तो बनारस की अर्थव्यवस्था में कॉरिडोर बनने के बाद से 10 गुना बढ़ोत्तरी हुई है। साल 2021 में लोकार्पण से पहले तक जितनी संख्या में धार्मिक पर्यटन के लिए लोग आते थे उनकी संख्या सुविधाओं के अभाव में बेहद कम होती थी लेकिन जैसे-जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं में इजाफा हुआ यहां पर पर्यटकों की संख्या में करीब 10 गुना की वृद्धि हो गई है। यहां कोई भी पर्यटक आता है तो तो कम से कम 500-1000- 2000 रुपए तक खर्च करता है जिससे यहां की अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही है।