अयोध्या में दिवाली से पहले साधु-संतों ने मोर्चा खोल दिया है. उनका कहना है कि रामनगरी की रामलीला में अब एक्टर-एक्ट्रेस नहीं आने चाहिए। उन्होंने सितारों से सजी रामलीला का बहिष्कार करने का ऐलान किया है। संतों का आरोप है कि रामायण जैसी दिव्य गाथा को सिनेमाई अंदाज में प्रस्तुत कर उसकी मूल भावना से छेड़छाड़ की जा रही है।
इसको लेकर हनुमानगढ़ी मंदिर के पुजारी और संकट मोचन सेना के प्रमुख महंत संजय दास ने साफ कहा कि मनोरंजन की आड़ में भगवान राम की लीला को फिल्मी अंदाज में पेश किया जा रहा है। यह न केवल लीला के स्वरूप को विकृत करता है बल्कि भक्तों की आस्था को भी चोट पहुंचाता है।
महंत ने यह भी आरोप लगाया कि जिन कलाकारों को पवित्र पात्रों की भूमिका सौंपी जा रही है, वे खुद ऐसे जीवन जीते हैं जो धार्मिक मर्यादा के अनुरूप नहीं। उनका कहना है कि शराब पीने वाले, मांसाहार करने वाले और विवादित छवि वाले कलाकार भगवान राम, लक्ष्मण या सीता के रूप में मंच पर उतरें, यह धर्म का अपमान है।