भरत कुंड में पिंडदान के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी
- पौराणिक महत्व:भगवान राम के भाई भरत ने वनवास के बाद अयोध्या से लौटकर यहीं तपस्या की थी।इस स्थान पर भगवान राम ने भी अपने पिता राजा दशरथ का श्राद्ध व तर्पण किया था, जिसके बाद से यह पिंडदान के लिए बहुत पवित्र माना जाता है।
- आत्मिक शांति:ऐसा माना जाता है कि भरत कुंड में पिंडदान करने से दिवंगत आत्माओं को शांति मिलती है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- गया के समान महत्व:कुछ मान्यताओं के अनुसार, भरत कुंड में किया गया पिंडदान गया से भी बढ़कर माना जाता है।