राम ने पिता दशरथ का श्राद्ध भरतकुंड में किया था।



अयोध्या के पास भरतकुंड भगवान राम के भाई भरत की तपोभूमि है जहां राम ने पिता दशरथ का श्राद्ध किया था। पितृपक्ष में यह स्थल मिनी गया कहलाता है जहां पिंडदान गया के समान फलदायी है। भरत जी ने यहां 14 वर्ष तपस्या की और 27 तीर्थों का जल कूप में डाला। आज भी यहां श्राद्ध करने का महत्व है और दूर-दूर से लोग अपनों को तारने आते हैं। भारत कुंड अयोध्या को पितृपक्ष में मिनी गया भी कहा जाता है।
      भरत कुंड में पिंडदान के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी
  • पौराणिक महत्व:
    भगवान राम के भाई भरत ने वनवास के बाद अयोध्या से लौटकर यहीं तपस्या की थी।इस स्थान पर भगवान राम ने भी अपने पिता राजा दशरथ का श्राद्ध व तर्पण किया था, जिसके बाद से यह पिंडदान के लिए बहुत पवित्र माना जाता है।
  • आत्मिक शांति:
    ऐसा माना जाता है कि भरत कुंड में पिंडदान करने से दिवंगत आत्माओं को शांति मिलती है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • गया के समान महत्व:
    कुछ मान्यताओं के अनुसार, भरत कुंड में किया गया पिंडदान गया से भी बढ़कर माना जाता है।

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