अयोध्या के अलग-अलग मोहल्लों में इन पांच तीर्थंकरों से जुड़ी टोंक (मंदिर) स्थापित हैं, जहां देशभर से जैन श्रद्धालु माथा टेकने आते हैं। ये तीर्थंकर और उनकी जन्मभूमि इस प्रकार हैं:
- प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव: इनका जन्म अयोध्या के रायगंज मोहल्ले में हुआ था, जहाँ उनकी 31 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित है, जिसे 'बड़ी मूर्ति' के नाम से जाना जाता है।
दूसरे तीर्थंकर अजितनाथ: बक्सरिया टोला (बेगमपुरा) में इनकी टोंक मौजूद है।
- चौथे तीर्थंकर अभिनंदन स्वामी: रामकोट मोहल्ले में श्री रत्नपुरी जैन श्वेतांबर मंदिर स्थापित है।
- पांचवें तीर्थंकर सुमतिनाथ: मोहल्ला कंधरपुर गोडियाना राजघाट में उन्हें समर्पित एक मंदिर है।
14वें तीर्थंकर अनंतनाथ: इनका भी जन्म मोहल्ला कंधरपुर गोडियाना राजघाट में हुआ था।
दिगम्बर व श्वेताम्बर दोनों शाखाओं के मंदिर यहां हैं मौजूद
जैन धर्म की दो शाखाएं हैं जिनमें दिगम्बर जैन व श्वेताम्बर जैन शामिल हैं। इन दोनों शाखाओं के मंदिर व धर्मशालाएं यहां मौजूद हैं। इन दोनों शाखाओं के उपासकों की उपासना में कोई भेद नहीं है बल्कि दिगम्बर संत नग्न रहते हैं और आकाश को ही अपना वस्त्र मानते हैं। वहीं श्वेताम्बर जैन श्वेत वस्त्र धारण करते हैं।