नीतीश कुमार: 1985 में पहली बार बने विधायक, 6 बार सांसद और अटल सरकार में संभाली 'रेल।



         बिहार।  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का विधायी सफर राजनीतिक अनुभव और प्रशासनिक दक्षता का उदाहरण है। उन्होंने विधानसभा चुनावों में भाग लिया और 2005 से विधान परिषद (MLC) के सदस्य के रूप में कार्य करते हुए मुख्यमंत्री पद संभाला। 2024 में वे चौथी बार विधान परिषद पहुंचे थे।
        राजनीतिक विश्लेषक ओमप्रकाश अश्क कहते हैं कि चुनाव लड़े या न लड़े बिहार के सर्वमान्य लीडर नीतीश कुमार ही हैं। हरनौत उनका पारंपरिक सीट रहा है। यहां से वे दो बार चुनाव हारे हैं, तो दो बार जीते भी हैं।
        विधानसभा क्षेत्र से उनकी आखिरी जीत 1995 में हुई। इसके बाद से विधानसभा का प्रत्यक्ष चुनाव नहीं लड़े हैं। यह दृष्टिकोण चुनावी प्रक्रियाओं से अलग होकर प्रशासन पर अधिक समय देने की अनुमति प्रदान करता है।
           

छह बार सांसद चुने गए, अटल सरकार में रेल मंत्री रहे

1995 के बाद नीतीश कुमार ने केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। वह कुल 6 बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए, जिनमें 1989, 1991, 1996, 1998, 1999, और 2004 के निर्वाचन वर्ष शामिल हैं। 1989 से 2004 तक, उन्होंने केंद्र में सक्रिय रूप से कार्य किया और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में महत्वपूर्ण पद संभाले, जिनमें कृषि मंत्री और रेल मंत्री के पद प्रमुख हैं।

एक टिप्पणी भेजें

आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

और नया पुराने