मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़क किनारे टेंपो, बस या रिक्शा खड़ा करने पर नाराजगी जताई है। सड़क किनारे वाहनों के स्टैंड प्रतिबंधित करने के निर्देश दिए और कहा कि किसी भी स्थिति में स्टैंड न बनने दें। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्ती का भी निर्देश देते हुए कहा कि ऐसे लोगों का केवल चालान नहीं कठोर कार्रवाई करें। पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए और अव्यवस्थित पार्किंग पर सख्त कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि सड़क आवागमन के लिए होती है, वाहन खड़ा करने के लिए नहीं। हाईवे और एक्सप्रेसवे के किनारे लंबे समय तक खड़े वाहनों, डग्गामार वाहनों और सड़क किनारे खड़े कतारबद्ध ट्रकों को गंभीर दुर्घटना का कारण बताते हुए उन्होंने इनपर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुर्घटनाओं का उदाहरण सामने रखकर लोगों को समझाया जाए ताकि वे बेहतर समझ सकें।
सीएम योगी ने कहा कि पब्लिक एड्रेस सिस्टम का व्यापक और प्रभावी उपयोग किया जाए, ताकि यह संदेश हर व्यक्ति तक पहुंचे कि सड़क सुरक्षा किसी और की नहीं, बल्कि उनके अपने जीवन और परिवार से जुड़ा विषय है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस अभियान में राष्ट्रीय सेवा योजना, राष्ट्रीय कैडेट कोर, आपदा मित्र, स्काउट गाइड और सिविल डिफेंस जैसे संगठनों की सक्रिय और प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित की जाए। युवाओं और स्वयंसेवी संगठनों की सहभागिता से ही यह अभियान वास्तविक अर्थों में जन आंदोलन बन सकेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल चालान करना सड़क दुर्घटनाओं का स्थायी समाधान नहीं है। जो लोग आदतन यातायात नियमों का उल्लंघन करते हैं, उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। ऐसे मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस जब्त करने और वाहन सीज करने की स्पष्ट नियमावली तैयार कर उसका सख्ती से पालन कराया जाए। मुख्यमंत्री ने स्टंटबाजी करने वाले युवकों के विरुद्ध भी पूरी सख्ती बरतने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नियोजित प्रयासों के परिणामस्वरूप जहरीली मदिरा बनाने और बेचने की अवैध गतिविधियां लगभग समाप्त हो चुकी हैं, फिर भी व्यवस्था को सजग रहना होगा।
सड़क सुरक्षा माह की समीक्षा
1-31 जनवरी तक सड़क सुरक्षा माह मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस दौरान ई-4 मॉडल, यानी शिक्षा, प्रवर्तन, इंजीनियरिंग और इमरजेंसी केयर अपनाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने सड़क सुरक्षा माह की तैयारियों की समीक्षा के दौरान कहा कि एक्सप्रेसवे पर पेट्रोलिंग, एम्बुलेंस और क्रेन की संख्या बढ़ाई जाए। यह अभियान किसी भी सूरत में औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक के जीवन से जुड़ा जन आंदोलन बने। नए साल की शुरुआत केवल औपचारिक आयोजनों से नहीं बल्कि व्यापक जनभागीदारी औार व्यवहार परिवर्तन के लक्ष्य के साथ होनी चाहिए।