37 साल का संघर्ष हुआ खत्म, पांच दिन में पीपा पुल से शुरू होगा आवागमन; 80 परिवारों को मिलेगी राहत।

         रायबरेली। कचनावां ग्राम पंचायत के दो पुरवा पूरे पासी व पूरे गोड़िया के ग्रामीणों के सामने आने जाने का संकट था। बच्चों की पढ़ाई या अन्य जरूरी काम के लिए लोगों को नाव के सहारे महराजगंज ड्रेन पार करके आना जाना पड़ रहा था।
         सभी से गुहार लगाई, लेकिन सिर्फ वादे मिल रहे थे। यह मामला शासन तक पहुंचा तो यहां पीपा पुल बनाने की स्वीकृति मिली। अब पीपा पहुंचने के साथ ही इसका निर्माण भी शुरू हो गया है। पांच दिनों में पीपा पुल बनने के बाद इससे आवागमन शुरू हो जाएगा।

       ग्राम पंचायत कचनावां के पूरे पासी व पूरे गोड़िया सई नदी और महराजगंज ड्रेन के बीच बसे हुए हैं। इन दोनों गांवों में लगभग 80 परिवार रहते हैं, जिनकी आबादी करीब 400 के आसपास है। इनमें लगभग 100 छात्र-छात्राएं पढ़ाई के लिए प्रतिदिन ड्रेन पार कर विद्यालय जाते हैं। गांव में पहुंचने के लिए कोई पक्का रास्ता नहीं है और ग्रामीणों को खेतों की मेड़ों के सहारे आना-जाना पड़ता है।
        ग्रामीणों ने बताया?

ग्रामीणों ने बताया कि यहां के लोग मुख्य रूप से खेती-किसानी पर निर्भर हैं। नदी किनारे होने के कारण बड़ी मात्रा में सब्जियों की खेती की जाती है, जिन्हें बेचने के लिए आसपास के बाजारों तक नाव के माध्यम से ले जाया जाता है। अचानक किसी के बीमार होने पर छोटी नाव के सहारे मरीज को अस्पताल ले जाना पड़ता है, जिससे कई बार गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जाती थी।

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