विराट संतों का भंडारा का आयोजन हुआ हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन महन्त के संयोजन में।



       अयाेध्या। सुप्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर के वर्तमान गद्दीनशीन महंत प्रेमदासजी महाराज ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम ने सभी काे अपनाया। उन्हाेंने कभी ऊंच-नीच का भेद नही किया। अतः वे मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए। जिन्हाेंने पूरी दुनिया काे मानवता का संदेश दिया। ऐसे हमारे भगवान श्रीराम हैं। जिनका अनुसरण हम सभी लाेगाें काे करना चाहिए। उन्हाेंने कहा कि शिष्य को अपने नाम, काम और धाम से समर्पित हाेना चाहिए। कीर्तन वही कर सकता है जाे कीर्ति व तन से ऊपर हाे जाए। जिसकी कीर्ति हमें जीवन में सुकीर्ति प्रदान करती है। वह हमारे रघुनाथ हैं, जिसका मन निर्मल है वही परमात्मा काे प्राप्त कर सकता है। भजन झंझटाें से जूझने का सामर्थ्य देता है। संत काे पूरे ब्रहांड की चिंता हाेती है। वह हमें भगवंत का रास्ता दिखाते हैं। परमात्मा काे आंखाे से नही कानाें से देखा जाता है। सुख का अनुभव कामना की निवृत्ति में हाेता है। विद्वानाें की संगति रखना सबसे बड़ा आचरण है। परमात्मा के साथ लाैकिक सम्बंध भी हमारा उद्धार करता है।

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