रंगमहल में सजी गलबहियां की झांकी, राम-जानकी के अलौकिक स्वरूप के दर्शन कर निहाल हुए श्रद्धालु।
अयोध्या। सावन के झूलनोत्सव के बीच प्राचीन रंगमहल मंदिर में प्रसिद्ध गलबहियां की झांकी सजाई गई। भगवान श्रीराम और माता जानकी के युगल स्वरूप का विशेष श्रृंगार किया गया। झांकी में राम-जानकी एक-दूसरे के कंधे पर हाथ रखे गलबहियां डाले नजर आए। युगल सरकार के इस मनोहारी स्वरूप के दर्शन के लिए मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने जय श्रीराम और सीताराम के जयकारे लगाए रंगमहल की यह झांकी अयोध्या की विशिष्ट मधुरोपासना परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। मंदिर में भगवान श्रीराम की सेवा दूल्हे के भाव से की जाती है और सेवायत स्वयं को माता जानकी की सखी के भाव में रखकर आराध्य की सेवा करते हैं।
प्रेम और आत्मीयता का भाव कराता है गलबहियां का दर्शन।
गलबहियां की झांकी को राम-जानकी के प्रेम, आत्मीयता और समर्पण के भाव का प्रतीक माना जाता है। सावन के झूलनोत्सव में जब युगल सरकार हिंडोले पर विराजमान होते हैं तो उनके विभिन्न स्वरूपों की झांकियां सजाई जाती हैं। इसी क्रम में गलबहियां की झांकी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है।
मंदिर के महंत रामशरण दास जी महाराज ने बताया कि गलबहियां की झांकी केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि रंगमहल की प्राचीन मधुरोपासना परंपरा का हिस्सा है। भगवान स्वयं हिंडोले पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देते हैं। इस विशेष झांकी के दर्शन के लिए अयोध्या के साथ आसपास के जिलों और दूर-दराज क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।
विशेष श्रृंगार से सजा युगल सरकार का स्वरूप।
मंदिर के पुजारी साकेत दास ने बताया कि सावन में भगवान श्रीराम और माता जानकी को हिंडोले पर विराजमान कर प्रतिदिन विशेष श्रृंगार किया जाता है। गलबहियां की झांकी के लिए युगल सरकार का विशेष रूप से श्रृंगार किया गया। राम-जानकी के इस स्वरूप को देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
दर्शन से मिलती है आत्मिक शांति।
मंदिर के व्यवस्थापक छोटू भैया ने बताया कि गलबहियां की झांकी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहता है। सावन में अयोध्या का वातावरण राममय हो जाता है। रंगमहल में होने वाला झूलनोत्सव भक्तों के लिए विशेष आकर्षण रहता है। उन्होंने कहा कि राम-जानकी के युगल स्वरूप के दर्शन से श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति और आनंद की अनुभूति होती है।
पूरे सावन चलता है झूलनोत्सव।
अयोध्या के मंदिरों में सावन के दौरान झूलनोत्सव की प्राचीन परंपरा रही है। रंगमहल में भी पूरे सावन भगवान श्रीराम और माता जानकी को हिंडोले पर विराजमान कराया जाता है। सावन शुक्ल पक्ष की एकादशी पर गलबहियां की प्रसिद्ध झांकी सजाई जाती है। झांकी के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है और पूरा वातावरण भक्ति व उत्सव के रंग में रंग जाता है।
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झूलनोत्सव।