शारीरिक चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए नीतीश बने IAS, यूपीएससी में मिला 847 वीं रैंक।


        नारनौल। कहावत सत्य हुई कि यदि मन में कुछ कर गुजरने का दृढ़ संकल्प हो, तो बड़ी से बड़ी कठिनाई भी रास्ता छोड़ देती है। जिले के खटोटी कलां गांव के रहने वाले नीतीश कुमार ने इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है।
        

हौसले से रचा इतिहास

शारीरिक चुनौतियों और गंभीर बीमारी से संघर्ष करते हुए उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 847 प्राप्त कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

         नीतीश कुमार की सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो छोटी-छोटी कठिनाइयों के कारण अपने सपनों से समझौता कर लेते हैं। कम कद और गंभीर बीमारी के चलते वे किशोरावस्था तक नियमित रूप से स्कूल भी नहीं जा सके।

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