लखनऊ। गोमती जल को निर्मल बनाने के लिए तेजी से काम चालू करने की कार्ययोजना तैयार की गई है। गोमती में प्रदूषण रोकने को तैयार मास्टर प्लान तैयार किया गया है। शहर से निकलने वाले सीवेज को सीधे गोमती में पहुंचने से रोकने के लिए नालों की टैपिंग, फ्लो डायवर्जन, एसटीपी की क्षमता बढ़ाने और नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने की दिशा में काम किया जाएगा।
ड्रोन सर्वे के बाद गोमती में गिरने वाले 45 नालों की पहचान हुई है। अब इन नालों के जरिए नदी में पहुंच रहे सीवेज का शोधन सुनिश्चित करने के लिए अलग-अलग एसटीपी से जोड़ने की योजना पर काम हो रहा है। बुधवार के अंक में दैनिक जागरण ने गोमती नदी की दशा और मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी अफसरों की लापरवाही को बताया था। इसके बाद ही यह सक्रियता दिखाई दी है।
राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक जोगिंदर सिंह ने बताया कि नदियों को स्वच्छ बनाना प्राथमिकता है। विभाग ने नए नालों की पहचान की है, जिन्हें जल्द शोधित किया जाएगा। इससे शहर के बड़े हिस्से से गुजरने वाली गोमती नदी का स्वरूप बदलेगा।
एसटीपी से जोड़कर सीवेज शोधन कराने का प्रस्ताव
गोमती नदी करीब 30 किलोमीटर की लंबाई में प्रवाहित होती है। नगर निगम के रिकार्ड में गोमती में गिरने वाले 33 नालों का उल्लेख था। ड्रोन सर्वे के बाद 12 नए नाले चिह्नित किए गए। 45 नालों में से 12 से लगभग 75 एमएलडी डिस्चार्ज टैप किया जा चुका है। पांच नालों में टैपिंग की आवश्यकता नहीं पाई गई। गोमती के पुनरुद्धार के लिए तैयार प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट में नालों को अलग-अलग एसटीपी से जोड़कर सीवेज शोधन कराने का प्रस्ताव है।