बस्ती । समाजवादी आन्दोलन के अगुवा डॉ. राम मनोहर लोहिया को उनकी 56 वीं पुण्य तिथि पर याद किया गया। समाजवादी पार्टी कार्यालय पर गुरूवार को आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने डा. लोहिया के विचारों पर प्रकाश डालते हुये उन्हें नमन् किया, और उनके बताए गए मार्ग पर चलने का प्रण किया।
समाजवादी पार्टी जिलाध्यक्ष एवं बस्ती सदर विधायक महेन्द्रनाथ यादव ने कहा कि डा. लोहिया ने आजाद भारत में सत्ता से सवाल पूछना सिखाया और सत्ता के खिलाफ रहकर भारतीय राजनीति के साथ भारतीयों पर गहरा प्रभाव छोड़ा। उनका समाजवाद विश्व इतिहास से सीखते हुए भारतीय सभ्यता, भारतीय संस्कृति और भारतीय मानवतावाद से प्रभावित था। ऐसे महान व्यक्तित्व की प्रेरणा लेकर उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लेकर सपा चुनाव मैंदान में उतरेगी।
पूर्व विधायक राजमणि पाण्डेय, वरिष्ठ नेता श्रीपति सिंह, विधायक कविन्द्र चौधरी 'अतुल' ने कहा कि लोहिया भारतीय राजनीति में गैर कांग्रेसवाद के शिल्पकार थे। डा. लोहिया चाहते थे कि दुनियाभर के सोशलिस्ट एकजुट होकर मजबूत मंच बनाए. और उनके अथक प्रयासों का फल था कि 1967 में कई राज्यों में कांग्रेस की पराजय हुई, हालांकि केंद्र में कांग्रेस जैसे-तैसे सत्ता पर काबिज हो पाई। लोहिया ने जो गैर-कांग्रेसवाद की अलख जगाई थी, वह आगे चलकर 1977 में केंद्र में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार के रूप में फलीभूत हुई. लोहिया मानते थे कि अधिक समय तक सत्ता में रहकर कांग्रेस अधिनायकवादी हो गई थी और वह उसके खिलाफ संघर्ष करते रहे। उन्होने जनहित के सवालों को लेकर आजीवन संघर्ष किया।
चन्द्रभूषण मिश्र, सुरेन्द्र सिंह 'छोटे', राम शंकर निराला, समीर चौधरी आदि ने कहा कि राममनोहर लोहिया प्रखर चिंतक तथा समाजवादी राजनेता थे। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान और स्वतंत्रता के बाद ऐसे कई नेता हुए, जिन्होंने अपने दम पर शासन का रुख बदल दिया उनमें से ही एक थे राममनोहर लोहिया। अपनी प्रखर देशभक्ति और समाजवादी विचारों के कारण डॉ. लोहिया ने अपने विरोधियों के बीच भी अपार सम्मान हासिल किया।
डा. राम मनोहर लोहिया के पुण्य तिथि पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य रूप से, जावेद पिण्डारी, अरविन्द सोनकर, रजवन्त यादव, मो. सलीम, राजेन्द्र चौधरी, मो. उमर, गुलाम गौस, निर्मल सिंह, राघवेन्द्र सिंह, घनश्याम यादव, अशोक यादव, रामउजागिर गौतम, मो. सज्जू, गीता भारती, के साथ ही सपा के अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता शामिल रहे।
समाजवादी पार्टी जिलाध्यक्ष एवं बस्ती सदर विधायक महेन्द्रनाथ यादव ने कहा कि डा. लोहिया ने आजाद भारत में सत्ता से सवाल पूछना सिखाया और सत्ता के खिलाफ रहकर भारतीय राजनीति के साथ भारतीयों पर गहरा प्रभाव छोड़ा। उनका समाजवाद विश्व इतिहास से सीखते हुए भारतीय सभ्यता, भारतीय संस्कृति और भारतीय मानवतावाद से प्रभावित था। ऐसे महान व्यक्तित्व की प्रेरणा लेकर उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लेकर सपा चुनाव मैंदान में उतरेगी।
पूर्व विधायक राजमणि पाण्डेय, वरिष्ठ नेता श्रीपति सिंह, विधायक कविन्द्र चौधरी 'अतुल' ने कहा कि लोहिया भारतीय राजनीति में गैर कांग्रेसवाद के शिल्पकार थे। डा. लोहिया चाहते थे कि दुनियाभर के सोशलिस्ट एकजुट होकर मजबूत मंच बनाए. और उनके अथक प्रयासों का फल था कि 1967 में कई राज्यों में कांग्रेस की पराजय हुई, हालांकि केंद्र में कांग्रेस जैसे-तैसे सत्ता पर काबिज हो पाई। लोहिया ने जो गैर-कांग्रेसवाद की अलख जगाई थी, वह आगे चलकर 1977 में केंद्र में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार के रूप में फलीभूत हुई. लोहिया मानते थे कि अधिक समय तक सत्ता में रहकर कांग्रेस अधिनायकवादी हो गई थी और वह उसके खिलाफ संघर्ष करते रहे। उन्होने जनहित के सवालों को लेकर आजीवन संघर्ष किया।
चन्द्रभूषण मिश्र, सुरेन्द्र सिंह 'छोटे', राम शंकर निराला, समीर चौधरी आदि ने कहा कि राममनोहर लोहिया प्रखर चिंतक तथा समाजवादी राजनेता थे। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान और स्वतंत्रता के बाद ऐसे कई नेता हुए, जिन्होंने अपने दम पर शासन का रुख बदल दिया उनमें से ही एक थे राममनोहर लोहिया। अपनी प्रखर देशभक्ति और समाजवादी विचारों के कारण डॉ. लोहिया ने अपने विरोधियों के बीच भी अपार सम्मान हासिल किया।
डा. राम मनोहर लोहिया के पुण्य तिथि पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य रूप से, जावेद पिण्डारी, अरविन्द सोनकर, रजवन्त यादव, मो. सलीम, राजेन्द्र चौधरी, मो. उमर, गुलाम गौस, निर्मल सिंह, राघवेन्द्र सिंह, घनश्याम यादव, अशोक यादव, रामउजागिर गौतम, मो. सज्जू, गीता भारती, के साथ ही सपा के अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता शामिल रहे।