मनोरमा की पुकार प्रशासन खामोश, सड़क पर उतरा जनसैलाब।


     
       पाँच दिनों से चल रहा मनोरमा नदी सफाई अभियान अब केवल सफाई का कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ जनआक्रोश का प्रतीक बन चुका है। नदी को अविरल और निर्मल बनाने के उद्देश्य से शुरू हुआ यह अभियान अपने अंतिम चरण में पहुँचते-पहुँचते एक बड़े जनांदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। समाजसेवी चन्द्रमणि पाण्डेय ‘सुदामा’ के नेतृत्व में सैकड़ों युवाओं ने जिस तरह बिना संसाधन, बिना सरकारी सहायता और बिना मशीनरी के श्रमदान किया, उसने प्रशासन की निष्क्रियता को खुली चुनौती दे दी है।


भाजपा नेता एवं समाजसेवी चन्द्रमणि पाण्डेय ने प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि केवल प्रतीकात्मक प्रयासों से मनोरमा नदी को बचाया नहीं जा सकता। उनके अनुसार सरकार के पास संसाधन, मशीनरी और विभागीय संरचना होने के बावजूद ठोस कार्ययोजना का अभाव प्रशासनिक विफलता को उजागर करता है।

उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि प्रशासन अब भी नहीं जागा तो आंदोलन सड़क से कार्यालय तक पहुँचेगा।

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