सीतापुर जिले के 170 गांवों में बढ़ेगी जमीन की मांग, गोमती तटबंध से आर्थिक विकास को मिलेगी गति।


        सीतापुर। लखनऊ के फैजुल्लागंज से नैमिषारण्य तक गोमती पर मार्गयुक्त तटबंध की योजना सिर्फ बाढ़ से राहत और आवागमन सुधारने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि करीब 170 तटवर्ती गांवों की आर्थिक तस्वीर भी बदल जाएगी।

गोमती की बाढ़, जलभराव और खराब संपर्क के कारण जिन गांवों में लोग जमीन खरीदने में रुचि नहीं दिखाते थे। तटबंध और बेहतर सड़क संपर्क के चलते जमीन की मांग बढ़ जाएगी। राजधानी लखनऊ से नैमिषारण्य का सीधा जुड़ाव होने से इन गांवों में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार होगा।

       गोमती की बाढ़, जलभराव और खराब संपर्क के कारण जिन गांवों में लोग जमीन खरीदने में रुचि नहीं दिखाते थे। तटबंध और बेहतर सड़क संपर्क के चलते जमीन की मांग बढ़ जाएगी। राजधानी लखनऊ से नैमिषारण्य का सीधा जुड़ाव होने से इन गांवों में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार होगा।

       नैमिषारण्य में लगातार बढ़ रहे तीर्थाटन को देखते हुए होटल, धर्मशाला, भोजनालय, दुकान, पार्किंग और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए आसपास जमीन की जरूरत बढ़ रही है। अब इन गांवों की जमीन निवेशकों को आकर्षित करेगी।

       फैजुल्लागंज से नैमिषारण्य के बीच घैला, अंबरपुर, बेरसापुर, सलेमपुर, हमीरपुर, अकबरपुर रेवान, कटाइन, पटिया, हिंदौर, तेरवा, कुर्सी, अल्लीपुर, बालपुर, इस्माइलगंज, मझरी, पारा, छूला, गइथा, गोपालपुर, रामपुर, महेशपुर, गांगूपुर, कुंवरपुर, ककरघटा, रामसाला, पनरभू, बेखनापुर, पनाहनगर, दोहारी, ततरोई, गयावर व भैरमपुर आदि गांव आते हैं।

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